Add

Sunday, September 20, 2020

SCIENCE : GENERAL SCIENCE QUESTIONS ANSWER BANK

 


Q.1 जीवन की निरंतरता कौन से प्रक्रम द्वारा बनी रहती है 

(A) श्वसन 

(B) जनन 

(C) प्रकाश संश्लेषण 

(D) अनुकूलन 

C0RRECT ANSWER : ( B )


Q.2 कौन से पराक्रम के द्वारा उत्पन्न संतति अपने पैतृक के एकदम समान नहीं होती है 

(A) अलैंगिक जनन 

(B) लैंगिक जनन  

(C) अनिषेक जनन 

(D) असुत्री थेलिटोकी

C0RRECT ANSWER : ( C )

  



Q.3 प्रजनन आवश्यक है 

(A) एक जीव को जन्म देने के लिए 

(B) अनुकूलन के लिए 

(C) विभिनता उनके लिए 

(D) जाति की निरंतरता को बनाए रखने के लिए 

C0RRECT ANSWER : ( D )


Q.4 इसट्रस्ट  चेक कर पाया जाता है 

(A) गिब्बन में 

(B) गोरिल्ला में 

(C) गाय में 

(D) बंदर में 

C0RRECT ANSWER : ( C )


Q.6 उपरोक्त में से कौन सा जंतु द्विलिंगी है 

(A) कॉकरोच 

(B) जोक 

(C) बंदर 

(D) मधुमक्खी 

CORRECT ANSWER : ( B )


Q.6 मियोसाइट्स है  

(A) स्पर्मेटिडस

(B) युग्मक मात्र कोशिकाएं 

(C) अस्थि मजा कोशिकाएं 

(D) उसाइट्स 

C0RRECT ANSWER : ( B )


Q.7 बाह्य निषेचन मिलता है 

(A) मैमल्स  में 

(B) पक्षियों में 

(C) रेप्टाइल्स में 

(D) अस्थिल मछलियों में 

C0RRECT ANSWER : ( D )


Q.8 उपरोक्त में से कौन से जंतु की सबसे लंबी जीवन अवधि  है 

(A) हाथी 

(B) घोड़ा 

(C) मगरमच्छ 

(D) तोता 

C0RRECT ANSWER : ( D )


Q.9 कौन सा जंतु मौसमी प्रजनक है 

(A) बंदर 

(B) मनुष्य 

(C) पक्षी 

(D) कपि 

C0RRECT ANSWER : ( C )


Q.10 उपरोक्त में से कौन सा पराक्रम निषेचन पश्च घटना है 

(A) युग्मक जनन 

(B) युग्मक स्थानांतरण 

(C) निषेचन 

(D) भ्रूण परिवर्धन 

C0RRECT ANSWER : ( D )




Friday, September 18, 2020

भारतीय इतिहास के स्वर्णिम पृष्ठ ( PART 2 )

 भारतीय इतिहास के स्वर्णिम पृष्ठ : - ( PART 2 )

 भारतीय इतिहास के स्वर्णिम पृष्ठ : - ( PART 2 )

21.( आर्थिक जीवन ) -  गुप्त काल में कृषि पशुपालन उद्योग, शिल्प एवं व्यापार वाणिज्य में अभूतपूर्व उन्नति हुई

 इस युग में धातु शिल्प ,वस्त्र निर्माण, आभूषण कला, हाथी दांत उद्योग, जहाज उद्योग, बर्तन उद्योग की विशेष उन्नति हुई

 इस युग में शिल्पी हो तथा व्यापारियों ने अपने अपने संग बना रखे थे

 गुप्त काल में आंतरिक एवं वैदिक व्यापार दोनों उन्नत है चीन, लंका,  इंडोनेशिया, जावा, सुमित्रा, रोम  आदि से व्यापार होता था


22. ( राजस्व के स्रोत ) -   भाग, भोग , ऊपरीकर एवं उद्योग आदि राजस्व के स्रोत थे


23.(  फाह्यान का भारत वर्णन ) -   चीनी यात्री फाह्यान ए 399 से 414 ईसवी तक भारत का भ्रमण किया उसने भारत की आर्थिक, धार्मिक, सामाजिक एवं राजनीतिक स्थिति का वर्णन किया है


24.(  हर्षवर्धन की विजयें ) -  हर्ष में 606 ईसवी से 647 ईसवी तक शासन किया उसने वल्लभी के  राजा को पराजित किया

 और बंगाल तथा पूर्वी भारत को विजित किया

 उसने सिंध के राजा को भी पराजित किया, उसने औडू और कंगोद पर भी विजय प्राप्त की


25.( हर्ष का धर्म व ज्ञान के  सरंक्षक के रूप में मूल्यांकन ) -  हर्ष एक महान सेनापति  कला साहित्य धर्म का सरंक्षक  था  

उसने बौद्ध धर्म के प्रचार प्रसार के लिए कन्नौज में एक सभा का आयोजन किया उसके सरंक्षण में महायान बौद्ध धर्म का देश विदेश में प्रसार हुआ 

हर्षवर्धन 5 वें वर्ष में प्रयाग में महा मोक्ष परिषद का आयोजन करता था जिसमें विभिन्न धर्मों के देवी देवताओं की पूजा की जाती थी एवं विभिन्न धर्मावलंबियों को  दान दिया जाता था 


26. (   प्रयाग सभा ) -  643 ईसवी में हर्ष ने प्रयाग में महा मोक्ष परिषद का आयोजन किया यह  हर्ष की छट्टी सभा थी  इस अवसर पर 500000 लोगों से भी अधिक उपस्थित हुए

 इस सभा में बौद्धों, ब्राह्मणों, जेनों, निर्धनों, अहसायों आदि  को उदारतापूर्वक दान दिया गया                                            

27. ( साहित्य के क्षेत्र में उन्नति ) -  हर्ष स्वयं विद्वान था तथा विद्वानों का सरंक्षक था उसने नागानंद, प्रियदर्शिका तथा रत्नावली नामक ग्रंथ लिखे 

उसके दरबार में मयूर, बाणभट्ट, मातंग दिवाकर, जय सेन, भृतहरि आदि उच्च कोटि के विद्वान थे 

उसके समय में नालंदा, वल्लभी अधिक शिक्षा का प्रसिद्ध केंद्र था


28.( हर्ष का शासन प्रबंध ) -  हर्ष एक उच्च कोटि का प्रशासक था उसका प्रशासन निरंकुश था किंतु लोगों को अपने अपने क्षेत्रों में स्वशासन प्राप्त था


29.(  मंत्री परिषद ) -  सम्राट की सहायता के लिए एक मंत्रीपरिषद का गठन किया गया   राजधानी में एक सुव्यवस्थित सचिवालय था


30.(  सेना ) -  हर्ष के 5 हजार हाथी, 2000 घुड़सवार तथा 5000 पैदल सैनिक थे


31. (  साम्राज्य के भाग ) -  हर्ष का साम्राज्य भुक्तियों, विषयों आदि में विभक्त था


32. ( कर ) -  हर्ष के शासन काल में भाग "हिरंय" तथा बली  नामक कर प्रचलित थे 


33. ( दंड विधान ) -  कानून तोड़ने पर अपराधियों को दंड दिया जाता था 

शारीरिक दंड नहीं दिए जाते थे


34. (  ह्वेनसांग का भारत विवरण ) -  ह्वेनसांग ने 629 से 644  तक हर्षवर्धन के शासनकाल में भारत की यात्रा की थी उसके यात्रा वृतांत से तत्कालीन भारत की सामाजिक स्थिति,  धार्मिक स्थिति,  आर्थिक स्थिति,  राजनीतिक स्थिति शिक्षा आदि  के बारे में जानकारी मिलती है


35. (  चोल शासक ) -  उर्वघहेरी,  इलन जीत चेन्नी, चोल राजवंश का प्रथम शासक था करीकाल विज्याल्य, आदित्य प्रथम , राजराज प्रथम, राजेंद्र प्रथम, राजाधिराज प्रथम, आदि चोल वंश के प्रमुख शासक थे 

इनमें राजराज प्रथम तथा राजेंद्र प्रथम पराक्रमी एवं शक्तिशाली राजा थे 

इस वंश का अंतिम शासक राजेंद्र तृतीया 1279 में पांड्यों ने चोल राज्य पर अधिकार कर इसे समाप्त कर दिया 

                     

36.( चोल प्रशासन ) - 

केंद्रीय प्रशासन -  चोल शासन  का स्वरूप राजतंत्र आत्मक वंशानुगत था राजा प्रशासन का सर्वोच्च अधिकारी था


37. (  सैन्य संगठन ) -  चोलों की स्थाई सेना में पैदल, गजारोही, अश्वारोही आदि सैनिक शामिल थे  चोलों  के पास एक शक्तिशाली नौसेना थी


38. (  न्याय व्यवस्था ) -  राजा सर्वोच्च न्यायाधीश होता था 

न्याय के लिए नियमित न्यायालय का गठन किया गया था


39. ( राज्य की आय के स्रोत ) -  राज्य की आय का मुख्य स्रोत भू राजश्व था इसके अतिरिक्त राजस्व कर,  गृह कर,  व्यवसाय कर , आदि कर भी प्रचलित थे 


40. ( प्रांतीय प्रशासन ) -  साम्राज्य विभिन्न प्रांतों में विभक्त था 

जिन्हें मंडलम कहा जाता था इनका प्रशासक "मंडल मुंडाली" कहलाता था 


41. ( स्थानीय प्रशासन ) -  चोल प्रशासन की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता ग्रामीण एवं नगरीय स्तर पर स्थानीय स्वायत्तता की व्यवस्था थी जो प्रतिनिधि संस्थाओं उर, सभा, महासभा एवं नगरण के द्वारा संचालित होता था


42. ( चोल कला ) -  चोल सम्राटों ने अनेक विशाल मंदिर बनवाए जिनका निर्माण द्रविड़ शैली के अंतर्गत हुआ 

उनके द्वारा निर्मित मंदिरों में राजराज प्रथम का "गंगेकोंद्चोल्पुरम" तथा कोरंगनाथ , एरातेश्वर आदि उल्लेखनीय थे 

इस काल में ब्रम्हा, विष्णु , नटराज , रजा - रानियों आदि की सुन्दर मूर्तियाँ भी बनायीं गयी 

धातु मूर्तियों में नटराज शिव की काँस्य मूर्ति विशेष उल्लेखनीय हैं 


43.(चोल साहित्य ) - चोल शासक  शिक्षा एवं साहित्य के सरंक्षक थे तमिल एवं संस्कृत भाषाओं का प्रचलन था कमबन ने रामावतार की रचना की जयंगोंदार ने  कलितुन्ग्परनी की रचना की

                                       

44.( कल्हण की राजतरंगिणी ) -  कल्हण ने राजतरंगिणी की रचना की  जिसमें कश्मीर का इतिहास वर्णित है  इसमें महाभारत से लेकर सवयं अपने युग तक के कश्मीर के इतिहास का विवरण दिया गया है इसमें आठ तरंग तथा संस्कृत के कुल 7826 श्लोक है 

  कलंण की राजतरंगिणी संस्कृत में उपलब्ध उन रचनाओं में पहली महत्वपूर्ण रचना है जिनमें ऐतिहासिक इतिवृत्त की विशेषता पाई जाती है

कल्हण कृत राजतरंगिणी एक निष्पक्ष और निर्भय ऐतिहासिक कृति है


45.( विजयनगर साम्राज्य का उदय ) - विजयनगर साम्राज्य की स्थापना 1336  ईस्वी में हरिहर तथा बुक्का नामक दो भाइयों ने की 


46. ( संगम वंश ) - हरिहर प्रथम, बुक्का प्रथम, हरिहर द्वितीय , देवराय प्रथम, देवराय द्वितीय, विरुपाक्ष द्वितीय, आदि इस वंश के प्रतापी शासक थे 


47. ( सालुव वंश ) - 1485 में नरसिंह सलुव ने सालुव वंश की स्थापना की


48. ( तुलुव वंश ) - वीर नरसिंह ने तुलुव वंश की स्थापना की इस  वंश का महानतम शासक कृष्णदेव राय था

जिसने 1509  ईसवी 1529 ईसवी तक शासन किया उसके शासन काल में विजयनगर साम्राज्य ऐश्वर्या और शक्ति की दृष्टि से अपने चरमोत्कर्ष पर था 1565 में तालीकोटा का युद्ध में मुस्लिम राज्यों की संयुक्त सेनाओं ने रामराय को पराजित कर विजयनगर साम्राज्य को खूब लूटा 1570 से 1650 ईसवी तक अरविंदो वंश ने शासन किया विजयनगर साम्राज्य धीरे-धीरे पतन की ओर उन्मुख होता गया 


49. (सांस्कृतिक प्रगति ) - विजयनगर के शासकों ने साहित्य स्थापत्य कला चित्रकला संगीत कला को प्रोत्साहन दिया 

उन्होंने विजयनगर साम्राज्य को सांस्कृतिक गतिविधियों का उत्कृष्ट केंद्र बना दिया 

कृष्णदेव राय ने आयुक्तमालयदम नामक ग्रंथ लिखा  उनके दरबार में तेलुगु साहित्य के 8 सर्वश्रेष्ठ कवि रहते थे


50. ( कला के क्षेत्र में उन्नति ) - विजयनगर के शासकों ने स्थापत्य कला के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया 

कृष्णदेव राय ने विट्ठल स्वामी का मंदिर तथा देवराय द्वितीय ने हजारा मंदिर का निर्माण करवाया गोपुरम तथा मंदिर के स्तंभों के अलंकार पर विशेष रूप से ध्यान दिया गया

विजयनगर के शासकों द्वारा अनेक महलों एवं राजप्रशादों का भी निर्माण कराया गया इनमें विभिन्न देशों के रहन-सहन को दर्शाया गया है चित्रकला के अतिरिक्त मूर्तियों का निर्माण भी इस काल में प्रचुर मात्रा में किया गया   

51.(संगीत कला ) - कृष्णदेव राय के दरबार में अनेक प्रसिद्ध संगीतकार, गायक और नर्तक थे

 सायन ने  संगीत सार नामक पुस्तक लिखी लक्ष्मीनारायण ने  संगीत सर्वोदय नामक पुस्तक की रचना की 


 

नोट : आर्टिकल में किसी भी प्रकार की त्रुटी होने पर हमारी कोई जिम्मेदारी नहीं होगी 

Wednesday, September 16, 2020

भारतीय इतिहास के स्वर्णिम पृष्ठ ( part 1 )

 


भारतीय इतिहास के स्वर्णिम पृष्ठ : - ( PART 1 )

1. मौर्य साम्राज्य ( ई .पूर्व 323 से 185  ई.पूर्व तक )  कोटिल्य  के अर्थशास्त्र विशाखादत्त के मुद्राराक्षस , दीपवंश , महावंश , अशोक के अभिलेख आदि के मौर्य साम्राज्य के विषय में जानकारी मिलती है !


2. चन्द्र गुप्त मौर्य  ( ई .पूर्व 322 से 298  ई.पूर्व तक ) चन्द्रगुप्त मौर्य ने नन्द वंश के अंतिम शशक घनानंद को पराजीत कर 322 ई . पूर्व में मौर्या साम्राज्य की स्थापना की 

चन्द्र गुप्त ने पंजाब और सिंध पर अधिकार कर  लिया 

उसने ननद वंश का उन्मूलन किया और सेल्युकश को पराजीत किया

उसने दक्षिणी भारत के अधिकांश भाग  पर भी अधिकार कर लिया चंद्रगुप्त मौर्य एक योग्य शासक था


3. बिंदुसार  ( ई .पूर्व 298 से 272  ई.पूर्व तक )  चंद्रगुप्त  मौर्य का पुत्र बिंदुसार 298 ई. पूर्व में गद्दी पर बैठा उसने अपने पिता द्वारा जीते हुए क्षेत्रों को पूर्ण रूप से सुरक्षित रखा


4.  अशोक  ( ई .पूर्व 273 से 232  ई.पूर्व तक )  अशोक का विधिवत राज्य अभिषेक 269 ई. पूर्व में हुआ अशोक ने कश्मीर पर विजय प्राप्त की

 उसने कलिंग पर विजय प्राप्त की   उसने लोक कल्याण को राज्य का सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य बनाया

 उसने संपूर्ण विश्व को धार्मिक सहिष्णुता का पाठ पढ़ाया


5. अशोक का  धम्म  अशोक के धम के प्रमुख सिद्धांत थे  ---------

1.  सहिष्णुता

2.  अहिंसा

3. आडंबरहीनता

4. लोक कल्याण

5. श्रेष्ठ पवित्र नैतिकता पर बल देना

 अशोक ने दम के अंतर्गत पाप ही नेता गुरुजनों तथा माता-पिता की सेवा, पापों से दूर रहने, सभी धर्मों का आदर करने अहिंसा का पालन करने आत्मनिरीक्षण पर बल दिया

 

6. अशोक के धम्म  का स्वरूप -   फ्लीट  के अनुसार ये राज धर्म था तथा डॉ. राधा कुमुद मुखर्जी का अनुसार यह सार्वभौम धर्म था भंडारकर के अनुसार यह उपासक बौद्ध  धर्म था


7. मौर्य प्रशासन -----

 केंद्रीय प्रशासन - 

1. राजा

2. मंत्री परिषद

3. अधिकारी

4. नगर प्रबंध

5. सेना

6. गुप्तचर व्यवस्था

7. न्याय व्यवस्था

8.  राजस्व शासन

9. लोक कल्याण के कार्य

10. प्रांतीय शासन

11. जनपद में ग्रामीण शासन


8.  अशोक के प्रशासनिक सुधार ----

1. राजूंक,  युक्त एवं  प्रादेशिक आदि अधिकारियों की नियुक्ति करना

2. धर्म महामात्रों नियुक्ति

3. दंड विधान को उदार बनाना

4. प्राणी मात्र की भलाई के लिए सड़कों, कुओं, चिकित्सालयों का निर्माण करवाना

5. अहिंसा के पालन पर बल देना

6 ब्रिज भूमि को महामात्र नगर व्यवहारिक आदि की नियुक्ति करना, विदेश नीति को समसामयिक बनाना


9. गुप्त साम्राज्य की स्थापना गुप्त साम्राज्य का उदय तीसरी शताब्दी के अंत में हुआ था


10. श्री गुप्त -  श्री गुप्त ने गुप्त साम्राज्य की स्थापना की

11.  घटोत्कच -  घटोत्कच  श्री गुप्त का उत्तराधिकारी था उसका राज्य मगध के आसपास तक ही सीमित था

12.  चंद्रगुप्त प्रथम ( 391 ई. से 335 ईसवी तक ) - चंद्रगुप्त प्रथम एक प्रतापी शासक था उसने लिच्छवी वंश की कन्या देवी से विवाह किया उसने गुप्त वंश भी चलाया

13. समुद्रगुप्त - ( 335 ई . से 375 ई . तक ) -  हरिषेन द्वारा रचित प्रयाग प्रशस्ति के समुद्रगुप्त की विजय उपलब्धियों तथा चारित्रिक विशेषताओं की जानकारी मिलती है इसमें समुद्रगुप्त के राज्यअभिषेक, दिग्विजय एवं व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला गया है समुद्रगुप्त को "कविराज" दानी , उच्च कोटि का विद्वान,  विद्या का सरंक्षण,  धर्म निष्ठ,  पराक्रमी,  विनयशील, विजयकांक्षी आदि बताया गया है

 14.समुद्रगुप्त की विजयें

1. समुद्रगुप्त ने आर्यवर्त  के राजाओं पराजित किया, 2. समुद्रगुप्त ने दक्षिण के 12  राजाओं को भी पराजित किया

3. उसने मध्य भारत के आठवीको को भी पराजित किया 4.  सीमांत राज्यों और गणराज्य द्वारा समुद्र गुप्त की अधीनता स्वीकार करना 5.  पड़ोस के विदेशी राज्यों द्वारा  अधीन मैत्री करना

 15. चंद्रगुप्त द्वितीय ( 375 ई.  से 414 ई. तक) -  चंद्रगुप्त द्वितीय समुद्रगुप्त का पुत्र था

 वह एक पराक्रमी योद्धा और योग्य शासक था

 उसने वैवाहिक संबंधों द्वारा अपनी स्थिति सुदृढ़ कि उसने शकों को पराजित किया और वाहिक तथा बंगाल तक अपनी सत्ता का विस्तार किया

 कुमारगुप्त प्रथम -  उसने बड़ी संख्या में मुद्राएं जारी करवाई

 इसे पुष्यमित्र जातियों के विद्रोह का सामना करना पड़ा 

इसने नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना की


17. स्कंदगुप्त ( 455 ई.  से 467 ई. तक) -  स्कंद गुप्त ने हूणों को पराजित कर अपने पराक्रम का परिचय दिया वह प्रजापालक उदार तथा धर्म सहिष्णु शासक था 

वह एक योग्य प्रशासक था 

उसके समय में सौराष्ट्र के राज्यपाल  परणदत्त के पुत्र चक्रपालित ने सुदर्शन झील के बांध का पुनर्निर्माण किया


18.  गुप्त कला -  गुप्त काल में वास्तुकला की अत्यधिक उन्नति हुई इस युग में अनेक मंदिर बनाएंगे जिनमें तिगवा का मंदिर,  भूमरा का शिव मंदिर,  देवगढ़ का दशावतार मंदिर आदि उल्लेखनीय है  इस युग में मूर्तिकला का भी अत्यधिक विकास हुआ इस युग में निर्मित सुल्तानगंज की बुध मूर्ति,   मथुरा की विष्णु मूर्ति,  उदयगिरि की वराह  की मूर्ति, उल्लेखनीय हैं गुप्त चित्रकला के सर्वोत्कृष्ट उदाहरण अजंता की गुफाओं से प्राप्त हुए हैं अजंता के चित्र अद्वितीय है

19. साहित्य के क्षेत्र में उन्नति -  गुप्त काल में साहित्य का अत्यधिक विकास हुआ कालिदास ने अभिज्ञान शाकुंतलम्,  शुद्रक ने  मृच्नेछकटिकम्,  विशाखा दत्त ने मुद्राराक्षस नामक नाटक लिखकर गुप्त काल में स्मृतियों की रचना हुई जिनमें कानूनों का संकलन हुआ इस युग में नालंदा विश्वविद्यालय शिक्षा का एक प्रमुख केंद्र था

20. विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी - गुप्त काल में विज्ञान एवं तकनीकी की विभिन्न शाखाओं का महत्व पूर्ण विकास हुआ इस काल में गणित, खगोल, ज्योतिष, आयुर्वेद आदि का अत्यधिक विकास हुआ आर्यभट्ट एक प्रसिद्ध गणितज्ञ एवं ज्योति शास्त्री था वराहमिहिर ने प्रमुख तथा पुलिस का सिद्धांत प्रतिपादित किया वाग्भट ने आयुर्वेदिक के प्रसिद्ध ग्रंथ  'अष्टांग हृदय'  की रचना की इस युग में धातु विज्ञान की उन्नति हुई


                                             www.studyzone79.blogspot.com


Monday, September 14, 2020

हिंदी व्याकरण pdf

 IMAGE PAR CLICK KRKE PDF FILE DOWNLOAD KREN

Sunday, September 13, 2020

राजस्थान सामान्य ज्ञान ( बड़ा , छोटा )

                                                              राजस्थान सामान्य ज्ञान
  1. राजस्थान में सर्वाधिक क्षेत्रफल वाला जिला -  जैसलमेर 38401 वर्ग किलोमीटर
  2. राजस्थान में न्यूनतम क्षेत्रफल वाला जिला   -  धौलपुर 3032 वर्ग किलोमीटर
  3. राजस्थान का सर्वाधिक जनसंख्या वाला जिला - जयपुर
  4. राजस्थान का न्यूनतम जनसंख्या वाला जिला  - जैसलमेर
  5. राजस्थान का सबसे छोटा नगर - बोरखेड़ा (बांसवाड़ा)
  6. राजस्थान का सर्वाधिक जनसंख्या घनत्व वाला जिला - जयपुर 595 व्यक्ति प्रतिवर्ग किलोमीटर 
  7. न्यूनतम जनसँख्या घनत्व वाला जिला - जैसलमेर 17 व्यक्ति प्रतिवर्ग किलोमीटर
  8. सर्वाधिक लिंगानुपात वाला जिला -  डूंगरपुर 994
  9. न्यूनतम लिंगानुपात वाला जिला - धौलपुर 846
  10. राजस्थान के सर्वाधिक वृद्धि दर वाला जिला -  बाड़मेर  - 32.5%
  11. न्यूनतम वृद्धि दर वाला जिला -  श्रीगंगानगर 10%
  12. राजस्थान की सर्वाधिक साक्षरता प्रतिशत वाला जिला -  कोटा 76.6%
  13. राजस्थान का संपूर्ण साक्षर गांव  - मसूदा  (अजमेर)
  14. राजस्थान की न्यूनतम साक्षरता प्रतिशत वाला जिला -  जालौर 54.9%
  15. राजस्थान का सर्वाधिक पुरुष साक्षरता वाला जिला -  झुंझुनू 86.9 प्रतिशत
  16. न्यूनतम पुरुष साक्षरता वाला जिला -  प्रतापगढ़ 69.5%
  17. राजस्थान का सर्वाधिक महिला साक्षरता वाला जिला -  कोटा 65.9%
  18. राजस्थान का न्यूनतम महिला साक्षरता वाला जिला -  जालौर 38.5%
  19. राजस्थान का सर्वाधिक अनुसूचित जाति की जनसंख्या वाला जिला -  जयपुर
  20. राजस्थान का न्यूनतम अनुसूचित जाति की जनसंख्या वाला जिला -  डूंगरपुर


महत्वपूर्ण सामान्य ज्ञान प्रश्न ( pdf file )

Saturday, September 12, 2020

राजस्थान का एकीकरण ( 7 चरणों में )

प्रथम चरण :-


 

नाम - मत्स्य संघ

स्थापना - 18 मार्च, 1948

राजधानी - अलवर

प्रधानमंत्री - शोभाराम कुमावत (अलवर के)

- अलवर , भरतपुर, करौली , धौलपुर रियासतें व नीमराणा ठिकाना ( 4 रियासतें + 1 ठिकाना )

* राजप्रमुख - उदयभान सिंह (धौलपुर शासक )

उद्घाटनकर्ता - एन०वी०गॉडगिल (नरहरि विष्णु गाँड़गिल )

नाम मत्स्य संघ - के०एम०मुंशी के कहने पर रखा

द्वितीय चरण :-

पूर्व राजस्थान

राजधानी - कोटा

स्थापना - 25 मार्च , 1948

रियासतें - कोटा , बूंदी , झालावाड़, बांसवाड़ा, टोंक , प्रतापगढ़ , शाहपुरा , किशनगढ़ , डूंगरपुर रियासतें व

कुशलगढ़ ठिकाना को मिलाकर (9 रियासतें + 1 ठिकाना )

प्रधानमंत्री - गोकुल लाल ओसावा (शाहपुरा ) के

* राज प्रमुख - भीमसिंह (कोटा नरेश)।

उपराजप्रमुख - बहादुर सिंह ( बूंदी नरेश)

उद्घाटनकर्ता - एन०वी०गॉडगिल


तृतीय चरण :-

* नाम - संयुक्त राजस्थान

स्थापना - 18 अप्रैल , 1948

राजधानी - उदयपुर

रियासतें - पूर्व राजस्थान में उदयपुर रियासत को मिलाया। (10 रियासतें + 1 ठिकाना )

प्रधानमंत्री - माणिक्य लाल वर्मा (उदयपुर)

* राजप्रमुख - भूपाल सिंह ( उदयपुर नरेश)

उपराजप्रमुख - भीमसिंह ( कोटा नरेश)

उद्धाटनकर्ता - पं० जवाहरलाल नेहरू

चतुर्थ चरण :-

नाम - वृहद् राजस्थान

स्थापना - 30 मार्च , 1949

राजधानी - जयपुर

रियासतें - संयुक्त राजस्थान में जयपुर , जोधपुर, जैसलमेर , बीकानेर रियासते व लावा ठिकाना ( 14 रियासतें

+ 2 ठिकाने )

उद्घाटनकर्ता - सरदार वल्लभ भाई पटेल

प्रधानमंत्री - हीरालाल शास्त्री (जयपुर)

* महाराज प्रमुख - भूपाल सिंह ( उदयपुर नरेश)

राजप्रमुख - मानसिंह दवितीय (जयपुर नरेश)

उपराजप्रमुख - भीमसिंह (कोटा नरेश)

इस दिन को प्रतिवर्ष राजस्थान दिवस ' मनाते हैं।

पचम चरण :-

- संयुक्त वृहद (वृहतर) राजस्थान

स्थापना - 15 मई,

राजधानी - जयपुर

वृहद् राजस्थान में मत्स्य संघ को मिलाया ( 18 रियासतें + 3 ठिकाने)

डॉ० शंकर देव राय समिति की सिफारिश पर मत्स्य संघ को मिलाया

प्रधानमंत्री पद समाप्त व मुख्यमंत्री पद सृजित

* प्रथम मुख्यमंत्री - हीरालाल शास्त्री ( मनोनित)

इनको शपथ राजप्रमुख - मानसिंह द्वितीय ने दिलाई 

1949

षष्टम चरण :-

नाम - राजस्थान संघ

स्थापना - 26 जनवरी , 1950

राजधानी - जयपुर

* संयक्त व्रहद राजस्थान में सिरोही ( आबू - देलवाड़ा को छोड़कर ) मिलाया ( 19 रियासतें + 3 ठिकाने )

मुख्यमंत्री - हीरालाल शास्त्री

राजप्रमुख - मानसिंह द्वितीय

इस दिन भारत का संविधान लागू हुआ , अतः राजस्थान को विधिवत् नाम दिया गया।

सप्तम चरण :-

*नाम - राजस्थान ( वर्तमान )

स्थापना - 1 नवम्बर , 1956

राजधानी - जयपुर

* राजस्थान संघ में सिरोही का आबू देलवाड़ा भाग, अजमेर - मेरवाड़ा व मध्यप्रदेश के मंदसौर जिले का सुनेल

टप्पा जोड़ा गया व झालावाड़ का सिरोज क्षेत्र मध्यप्रदेश को दे दिया ( 26 जिले - राजस्थान का वर्तमान स्वरूप)

मुख्यमंत्री - माहनलाल सुखाझ़िया

* राजप्रमुख की जगह राज्यपाल पद सृजित

प्रथम राज्यपाल - गुरु मुख निहालसिह

राजस्थान के एकीकरण का श्रेय सरदार वल्लभभाई पटेलको जाता है।

राजस्थान का एकीकरण सात चरणों में पूरा हुआ।